प्रदेश में अब निकाय चुनाव चंद कदम दूर है। हाईकोर्ट में शपथपत्र देने के बाद अब तय हो गया है कि छह माह के भीतर सभी निकायों में नए बोर्ड का गठन हो जाएगा। इसके लिए सरकार को कुछ फैसले लेने हैं, जिसकी राह में वर्तमान आचार संहिता रुकावट बनी हुई है।

चुनाव आयोग से अनुमति मिली तो निकाय चुनाव की प्रक्रिया और आगे बढ़ जाएगी। नौ जनवरी को सरकार ने हाईकोर्ट में शपथपत्र दाखिल करते हुए कहा था कि छह माह के भीतर निकाय चुनाव करा दिए जाएंगे। किसी भी सूरत में प्रशासकों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा। इस हिसाब से छह माह के भीतर चुनाव होंगे, लेकिन इससे पहले कुछ काम करने हैं।

...ताकि निकायों में नया आरक्षण लागू हो सके

पहला काम आरक्षण का है। एकल सदस्यीय समर्पित आयोग ने निकायों में ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें कई निकायों में आरक्षण 14 प्रतिशत से घट गया है तो कई में 30 प्रतिशत तक पहुंच गया है। निकायों के एक्ट के हिसाब से केवल 14 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का ही प्रावधान है। लिहाजा, सरकार को एक्ट में संशोधन करना होगा, जिससे निकायों में नया आरक्षण लागू हो सके।

फिलहाल चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही ये संभव हो पाएगा। इसी प्रकार आरक्षण पूरा होने के बाद जिलों के स्तर से यह लागू होगा। फिर राज्य निर्वाचन आयोग अधिसूचना जारी करेगा। इसी आधार पर चुनाव होगा। वर्तमान में राज्य में पहले चरण में ही लोकसभा चुनाव होने के बाद आचार संहिता लागू है। चुनाव आयोग पहले ही एक आचार संहिता के बीच दूसरी निकाय चुनावों की आचार संहिता से इन्कार कर चुका है।

अब देखने वाली बात ये होगी कि सरकार और चुनाव आयोग किस तरह से इस दिशा में आगे बढ़ेंगे। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, काफी तैयारियां पूरी हैं। कैबिनेट या मुख्यमंत्री के विचलन से निर्णय के आधार पर बात आगे बढ़ सकती है।

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